Yogashan Ane Swasthya
| AUTHOR | Dev, Acharya Bhagwan |
| PUBLISHER | Diamond Books (08/27/2019) |
| PRODUCT TYPE | Paperback (Paperback) |
Description
योग भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम पहचानों में से एक है। यही वह विज्ञान है, जिसके बलबूते पर न केवल भारत कभी 'सोने की चिड़िया' कहलाता था, बल्कि विश्वगुरु बनकर भी उभरा था। भगवान शंकर के बाद वैदिक ऋषि-मुनियों से ही योग का प्रारंभ माना जाता है। बाद में कृष्ण, बुद्ध, महावीर आदि ने भी इसे अपनी तरह से विस्तार प्रदान किया। इसे आगे चलकर पतंजलि ने सुव्यवस्थित कर लिखित रूप दिया और योग सूत्र की रचना की, जो कि मनुष्य लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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Product Format
Product Details
ISBN-13:
9789351659907
ISBN-10:
9351659909
Binding:
Paperback or Softback (Trade Paperback (Us))
Content Language:
Gujarati
More Product Details
Page Count:
130
Carton Quantity:
60
Product Dimensions:
5.50 x 0.28 x 8.50 inches
Weight:
0.35 pound(s)
Country of Origin:
US
Subject Information
BISAC Categories
Fiction | General
Descriptions, Reviews, Etc.
publisher marketing
योग भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम पहचानों में से एक है। यही वह विज्ञान है, जिसके बलबूते पर न केवल भारत कभी 'सोने की चिड़िया' कहलाता था, बल्कि विश्वगुरु बनकर भी उभरा था। भगवान शंकर के बाद वैदिक ऋषि-मुनियों से ही योग का प्रारंभ माना जाता है। बाद में कृष्ण, बुद्ध, महावीर आदि ने भी इसे अपनी तरह से विस्तार प्रदान किया। इसे आगे चलकर पतंजलि ने सुव्यवस्थित कर लिखित रूप दिया और योग सूत्र की रचना की, जो कि मनुष्य लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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