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Bharat Ke Amar Manishi Swami Vivekanand (????? ??? ????? ??&

AUTHOR Rana, Bhawan Singh
PUBLISHER Diamond Books (05/02/2022)
PRODUCT TYPE Paperback (Paperback)

Description
उन्]नीसवीं सदी के उत्]तरार्ध के भारतीय नवजागरण के अग्रणी नेताओं में स्]वामी विवेकानन्]द का स्]थान अन्]यतम है। इतिहासकार एक मत से बीसवीं सदी के शुरू में राष्]ट्रीय आंदोलन में आये नये मोड़ में स्]वामीजी के कार्यों और संदेश का बड़ा योगदान मानते हैं। विवेकानंद द्वारा भारत की गरिमा को पुन जगाने का प्रयास मात्र राजनैतिक दासत्]व की समाप्ति के लिए नहीं था। दासत्]व की जो हीन भावना हमारे संस्]कार में घुल-मिल गयी है उससे भी त्राण पाने का मार्ग उन्]होंने बताया। विवेकानंद बड़े स्]वपन्]द्रष्]टा थे। उन्]होंने एक नये समाज की कल्]पना की थी, ऐसा समाज जिसमें धर्म या जाति के आधार पर मनुष्]य-मनुष्]य में कोई भेद नहीं रहे। उन्]होंने वेदांत के सिद्धांतों को इसी रूप में रखा। अध्]यात्]मवाद बनाम भौतिकवाद के विवाद में पड़े बिना भी यह कहा जा सकताहै कि समता के सिद्धांत की जो आधार विवेकानन्]द ने दिया, उससे सबल बौदि्धक आधार शायदही ढूंढा जा सके। विवेकानन्]द को युवकों से बड़ी आशाएं थीं। आज के युवकों के लिए ही इस ओजस्]वी संन्]यासी का यह जीवन-वृत्]त लेखक उनके समकालीन समाज एवं ऐतिहासिक पृ]ष्]ठभूमि के संदर्भ में उपस्थित करने का प्रयत्]न किया है यह भी प्रयास रहा है कि इसम&
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Product Format
Product Details
ISBN-13: 9789352614639
ISBN-10: 9352614631
Binding: Paperback or Softback (Trade Paperback (Us))
Content Language: Oriya
More Product Details
Page Count: 146
Carton Quantity: 50
Product Dimensions: 5.50 x 0.34 x 8.50 inches
Weight: 0.43 pound(s)
Country of Origin: US
Subject Information
BISAC Categories
Biography & Autobiography | Personal Memoirs
Descriptions, Reviews, Etc.
publisher marketing
उन्]नीसवीं सदी के उत्]तरार्ध के भारतीय नवजागरण के अग्रणी नेताओं में स्]वामी विवेकानन्]द का स्]थान अन्]यतम है। इतिहासकार एक मत से बीसवीं सदी के शुरू में राष्]ट्रीय आंदोलन में आये नये मोड़ में स्]वामीजी के कार्यों और संदेश का बड़ा योगदान मानते हैं। विवेकानंद द्वारा भारत की गरिमा को पुन जगाने का प्रयास मात्र राजनैतिक दासत्]व की समाप्ति के लिए नहीं था। दासत्]व की जो हीन भावना हमारे संस्]कार में घुल-मिल गयी है उससे भी त्राण पाने का मार्ग उन्]होंने बताया। विवेकानंद बड़े स्]वपन्]द्रष्]टा थे। उन्]होंने एक नये समाज की कल्]पना की थी, ऐसा समाज जिसमें धर्म या जाति के आधार पर मनुष्]य-मनुष्]य में कोई भेद नहीं रहे। उन्]होंने वेदांत के सिद्धांतों को इसी रूप में रखा। अध्]यात्]मवाद बनाम भौतिकवाद के विवाद में पड़े बिना भी यह कहा जा सकताहै कि समता के सिद्धांत की जो आधार विवेकानन्]द ने दिया, उससे सबल बौदि्धक आधार शायदही ढूंढा जा सके। विवेकानन्]द को युवकों से बड़ी आशाएं थीं। आज के युवकों के लिए ही इस ओजस्]वी संन्]यासी का यह जीवन-वृत्]त लेखक उनके समकालीन समाज एवं ऐतिहासिक पृ]ष्]ठभूमि के संदर्भ में उपस्थित करने का प्रयत्]न किया है यह भी प्रयास रहा है कि इसम&
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